मंगलवार, 24 जुलाई 2012

उसकी हंसी 

वो मुस्‍कराई थी आज 
मुझे देखकर 
उसके पीले पडते चेहरे पर 
हंसी की वजह तलाशता रहा
सोचा पूछ लूं
लेकिन फिर चुप हो गया
पर कौतूहल था
बहुत दिन बाद जो मुस्‍कराई थी
पर क्‍यों
कैसे पता करुं
फिर पूछ ही लिया
बोली -
बेटा,
आज तूने मुझे ध्‍यान से देखा
तो मन को अच्‍छा लगा
इसलिए चेहरे पर हंसी पर आ गई
खूब पाला पोसा 
पढाया लिखाया 
इतना बडा किया कि 
मैं उसे खिला संकू
पर फिर भी नहीं खिला पाया मैं 
पर उसे देखिए
वह जब से पैदा हुआ
तब से ही पाल रहा है
अपनी मां को
जन्‍म के पहले दिन ही
मां ने उसे गोद में उठाया
और खडी हो गई
शहर के चौराहे पर
उस मासूम के रोने की
आवाज सुन कई लोगों ने
बढाया था एक रुपया, दो रुपया
उसकी मां की ओर
बस तब से ही
उसकी मां ने भरपेट खाना शुरु किया
अगर रोना नहीं आता था उसे
तो चिकौटी काट कर रुला देती थी मां
ताकि पसीज जाए कोई ह्रदय
थोडा बडा हुआ तो
ढाबे का छोटू बन गया
और तब पाला मां को
और आज तक पाल रहा है .......

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

ब्रिक्स के मायने ...

ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका देशों के समूह ब्रिक्स की बैठक इन दिनों दिल्ली में हो रही है। कई अहम फैसले लिये जा रहे हैं। हालांकि मीडिया इतनी गंभीरता से नहीं ले रहा है, लेकिन यह तय है कि ये दो-तीन दिन 28 से 31 मार्च 2012 के दिन आने वाले सालों में याद रखे जाएंगे और इन दिनों का हवाला दिया जाएगा। ऐसा मुझे लगता है। अमेरिका की दादागिरी के खिलाफ इन पांच देशों ने जो फैसले लिये हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण है। जैसे, ईरान से तेल खरीदना जारी रखना और डॉलर के मुकाबले पांच देशों की अपनी मुद्रा का चलन शुरू करना। इन फैसलों के मायने क्या रहेंगे। यह वक्त बताएगा। परंतु अब भारत को अमेरिका का पिठ्ठू कहने से पहले कुछ तो सोचना होगा। वरना तो पिछले कुछ सालों में भारत जो भी कर रहा था, वह उसे अमेरिका का पिठठू मानने के लिये बाध्य कर रहा था।

शुक्रवार, 23 जनवरी 2009

अख़बार नहीं जूता निकालो

बहुत दिनों के बाद पोस्ट कर रहा हूँ। पिछले दिनों एक घटना हुई जिसने मीडिया के लोगो को सोचने का एक मौका दिया। कि क्या अब 'तोप यदि मुकाबिल हो तो अख़बार की जगह जूता निकाला जाए'| इसे हम पत्रकारिता के एथिक के खिलाफ मान सकते हैं । लेकिन यह भी सचाई है कि जिस तरह से मीडिया हाउस ताक़तवरों के हाथों की कठपुतली बनता जा रहा है, ऐसे समय में पत्रकारों को जूता ही निकालना पड़ेगा ।

मंगलवार, 11 मार्च 2008

क्या भारत में महिलाओं के साथ ऐसा बर्ताव होता है



छेड़छाड़, बदसलूकी, बलात्कार, घर में प्रताड़ना...देश में महिला राष्ट्रपति बनने जैसी एक सकारात्मक कहानी के पीछे कई कही-अनकही नकारात्मक कहानियाँ छिपी रहती हैं.

अपराधों की फ़ेहरिस्त
36617 बदसलूकी के मामले, 19348 बलात्कार, 17414 अपहरण, 7618 दहेज से जुड़े मामलों में मौतें और 63128 प्रताड़ना के मामले -राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो की ताज़ा रिपोर्ट (वर्ष 2006) के आँकड़े भयावह तस्वीर पेश करते हैं.

वर्ष 2006 में महिलाओं के प्रति अपराध के कुल एक लाख 64 हज़ार 765 मामले दर्ज किए गए.

वर्ष 2005 में 1,55,553 मामले दर्ज हुए यानि वर्ष 2005 के मुकाबले 2006 में 5.9 फ़ीसदी को बढ़ोत्तरी. और 2002 के मुकाबले 15.2 की वृद्धि.

बलात्कार भारत में इस समय सबसे तेज़ी से बढ़ता अपराध है. एक अनुमान के मुताबिक 1971 के बाद से बलात्कार की घटनाओं में 678 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.

राष्ट्रीय रिकॉर्ड्स अपराध ब्यूरो की नई रिपोर्ट में अगर बलात्कार करने वालों के प्रोफ़ाइल का अध्ययन करें तो परेशान करने वाले तथ्य सामने आते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार करने वालों में से 75 फ़ीसदी लोग जान-पहचान वाले होते हैं जिसमें परिवार के सदस्य, अभिभावक, पड़ोसी और रिश्तेदार शामिल हैं.

महज़ आँकड़ें नहीं हैं ये...

भारत में रहने वाली महिलाएँ तो अपराधों का शिकार बनती ही हैं, पिछले कुछ सालों में विदेशी महिला सैलानियों के साथ आपराधिक मामले भी तेज़ी से बढ़े हैं- गोवा और राजस्थान जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं.
अपराधों का ये सिलसिला कस्बों और नगरों में ही नहीं है, बड़े शहरों का भी हाल बुरा है. राष्ट्रीय अपराध दर 14.7 के मुकाबले शहरों में अपराध की दर 20.3 प्रतिशत है. देश की राजधानी दिल्ली का हाल सबसे बुरा है.
जहाँ देश की राजधानी ही इतनी असुरक्षित हो, वहाँ दूसरी जगहों पर क्या अपेक्षा की जा सकती है. 167.7 की राष्ट्रीय अपराध दर के मुकाबले दिल्ली में ये दर 357.2 है यानी दोगुनी.
हर साल आने वाले तमाम ऑंकड़ों की लंबी चौड़ी फ़ेहरिस्त में ये महज़ एक अन्य सूची नहीं है. इन अपराधों के पीछे सामाजिक, क़ानूनी और सांस्कृतिक..कई कारण हैं.
समाज इसका दोष क़ानून पर डालकर फ़ारिग हो जाता है तो क़ानून सामाजिक बदलाव की दुहाई देता है.
ये सच है कि आज भारत की राष्ट्रपति महिला है, दुनिया की सबसे ताक़तवर महिलाओं की सूची में भारत की सोनिया गांधी का नंबर छठा है, सानिया मिर्ज़ा विश्व की शीर्ष टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं, महिलाएँ आज कई ऐसे पेशों में धाक जमा रही हैं जहाँ पहले उन्होंने कभी क़दम नहीं रखा.
इसमें बेशक हमें गर्व महसूस करना चाहिए. लेकिन इस बदलते, चमकते, आर्थिक प्रगति करते भारत में महिलाओं का एक वर्ग आज भी हाशिए पर रहता है, असुरक्षित है.
काश के भारत इन्हें भी स्वाभिमान भरा सुरक्षित जीवन दे पाए ताकि दोबारा कोई आकर ये न पूछे कि क्या भारत में महिलाओं के साथ ऐसा बर्ताव होता है जैसा उस विदेशी सैलानी ने पूछा था.

सोमवार, 15 अक्टूबर 2007

एकता कपूर ने देश मैं शादी को मजाक बाना कर रख दिया है